Thursday, January 10, 2019

झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव की जमानत याचिका खारिज की

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दी। पिछले हफ्ते इस पर करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लालू के वकील कपिल सिब्बल ने उनकी बीमारियों और उम्र का हवाला दिया था। वहीं, सीबीआई के वकील ने लालू की जमानत याचिका का विरोध किया। लालू ने जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में हस्तक्षेप याचिका दायर कर जमानत की मांग की थी।

जमानत की अवधि 6 हफ्ते बढ़ाने की अपील की गई थी

याचिका में कहा गया था कि देवघर, चाईबासा और दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में इससे पहले भी उनको जमानत मिल चुकी है। लिहाजा उन्हें इस बार भी जमानत की दी जाए। सिब्बल ने मुंबई के हॉस्पिटल के लालू यादव की बीमारियों से संबंधित सर्टिफकेट भी पेश किए। जमानत की अवधि 6 हफ्ते और बढ़ाने की नई याचिका में कहा गया था कि लालू गंभीर रूप से बीमार हैं। वह प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्ट, किडनी और डिप्रेशन समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

जमानत के लिए तीन आधार बताए गए
लालू की ओर से दायर याचिका में तीन बातों को आधार बनाया गया था। लालू के वकील की ओर से जिस पहली बात को आधार बनाया गया, उसमें कहा गया कि इसी मामले में अन्य दोषियों को जमानत मिल चुकी है, खुद लालू को भी पूर्व में जमानत मिली थी, लिहाजा बेल दी जाए। दूसरा लालू के मेडिकल ग्राउंड और तीसरा आधार उम्र को बनाया गया।

23 दिसंबर 2017 से जेल में हैं लालू यादव
लालू को चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसम्बर 2017 को दोषी करार दिया था। तब से वह जेल में है। पिछले साल 17 मार्च को तबीयत बिगड़ने पर पहले रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया था। कोर्ट ने उन्हें 11 मई को इलाज के लिए छह हफ्ते की जमानत मंजूर की थी। इसे बढ़ाकर 14 और फिर 27 अगस्त तक किया। कोर्ट ने इसके बाद 30 अगस्त को लालू को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था।

फिलहाल रिम्स में हैं भर्ती
लालू बीमार होने की वजह से अभी रिम्स में भर्ती हैं। दुमका, देवघर और चाईबासा में फर्जीवाड़े के तीनों मामलों में हाईकोर्ट में उनकी अपील याचिका पर सुनवाई हो रही है।

मकर संक्रांति से ही होता है ऋतु परिवर्तन
मकर संक्रांति का एक और महत्व है जो हमारी दिनचर्या को प्रभावित करता है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है। इससे भारत सहित सूर्य के उत्तरी गोलार्ध क्षेत्र में सूर्य की किरणें सीधी पड़ने से ऋतु परिवर्तन होता है। ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होने के साथ ही दिन बड़े व रातें छोटी होने लगती हैं। यानी सर्द मौसम धीरे-धीरे विदा होने लगता है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमते हुए 72 से 90 साल के बीच में एक डिग्री पीछे हो जाती है। इस कारण से सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का समय व दिन बदलते रहते हैं। 2014 से 2016 तक मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई गई, जबकि 2017 व 2018 में यह 15 जनवरी को ही मनी थी। वैसे आपको बता दें कि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में यह पर्व पोंगल के रुप में मनाया जाता है।

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