Wednesday, January 30, 2019

जॉर्ज फ़र्नांडिस के 'सियासी क़ातिल' नीतीश कुमार: नज़रिया

बिहार के एक अज़ीम शायर कलीम आज़िज का यह शेर सियासत में कहाँ किन पर फ़िट बैठ रहा है, लोग यह समझ ही जाते हैं.

एक मुशायरे में इस शेर पर शायर को दाद देने वालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी शामिल देख अनायास ही मुझे जॉर्ज फ़र्नांडिस याद आ गए थे.

जॉर्ज जैसे धुरंधर लीडर के राजनीतिक जीवनकाल का आख़री अध्याय किस नेता की वजह से एक दर्दनाक दौर बन कर रह गया, यह कौन नहीं जानता ?

यहाँ आप को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के जीवित शिखर पुरुष लालकृष्ण आडवाणी भी याद आ जाएँ तो इसे स्वाभाविक ही कहा जाएगा.

वर्ष 1994 में बिहार से उभरे एक सियासी मंच (समता पार्टी) पर जॉर्ज-नीतीश का जो 'मशाल छाप' रिश्ता बना था, वह वर्ष 2009 के आते-आते 'तीर छाप' चुभन का शिकार हो गया.

चाहे जॉर्ज फ़र्नांडिस की अध्यक्षता वाली तत्कालीन समता पार्टी हो, या उसके विलय के बाद शरद यादव की अध्यक्षता वाला जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), दोनों के असली सूत्रधार तो नीतीश कुमार ही रहे हैं.

इसलिए जब राज्य की सत्ता और अपनी पार्टी पर मज़बूत पकड़ वाला बल नीतीश कुमार में बढ़ने लगा था, तब वह अपनी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ कुछ भी और किसी को भी क़बूल नहीं करने के मोड में दिखने लगे थे.

यही वह दौर था, जब उन्होंने जॉर्ज जैसे ऊँचे सियासी क़द वाले अपने गुरु (मेंटॉर) को भी हाशिए पर खिसकाने की सोच ली और अपनी इस चाहत में वो कामयाब भी हो गए.

दरअसल दोनों नेताओं के रिश्ते में दरार का पहला निशान वर्ष 2005 में ही दिख गया था.

लालकृष्ण आडवाणी ने उस वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से कई माह पूर्व ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए एनडीए का प्रत्याशी घोषित कर दिया था.

उस समय जेडीयू के एक बड़े नेता दिग्विजय सिंह ने इसका विरोध ये कहते हुए किया था कि इस बाबत एनडीए में जॉर्ज या अन्य किसी नेता से राय-मशवरा किये बिना आडवाणी जी को निजी तौर पर ऐसी घोषणा नहीं करनी चाहिए थी.

फिर तो जॉर्ज फ़र्नाडिस ने भी इस प्रसंग में छिड़ी चर्चा पर ये कह दिया कि मुख्यमंत्री का चुनाव पार्टी के निर्वाचित विधायकों की बैठक में हो, यही मुनासिब है.

बस यहीं से बात बिगड़नी शुरू हो गयी. माना जाता है कि इसी के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय नेतृत्व वाले ओहदे से जॉर्ज को दरकिनार कर के शरद यादव को इस बाबत अधिक तरजीह देने वाली रणनीति पर अमल होने लगा.

कहा यह भी जाता है कि नीतीश कुमार के दिल में इस कारण चुभा शूल तभी निकला, जब उन्होंने पहले बाँका से दिग्विजय सिंह को और बाद में मुज़फ़्फ़रपुर से जॉर्ज फ़र्नाडिस को लोकसभा चुनाव (2009) में जेडीयू का उम्मीदवार बनने नहीं दिया.

चूँकि पार्टी की ज़मीनी ताक़त नीतीश कुमार में निहित थी, इसलिए जॉर्ज से छुट्टी पा लेने जैसा बड़ा क़दम उठाने में किसी बड़ी रुकावट का उन्हें ख़तरा भी नहीं था.

लेकिन हाँ, राजनीति में नीतीश जिन्हें अपना अभिभावक, प्रेरक और मार्गदर्शक बताते नहीं थकते थे/हैं, उन्हीं को ख़राब स्वास्थ्य के बहाने पार्टी के चुनावी टिकट या राज्यसभा-सीट से वंचित कर देना नीतीश पर 'करामाती क़ातिल'-सा इशारा दे ही गया.

वैसे, इतनी खुली बात पर और खुल कर या विस्तार से क्या बोलना? यह मौक़ा ऐसा है भी नहीं. अच्छा है कि जॉर्ज फ़र्नांडीस के देहावसान पर भावुक हुए नीतीश के अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि वाले मार्मिक बोल ही मीडिया में मुखर हो रहे हैं.

Tuesday, January 22, 2019

कौन है हार्दिक पटेल की दुल्हनियां?

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल इस महीने विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं.

वो अपने बचपन के दिनों की दोस्त किंजल से इस महीने की 27 तारीख़ को शादी करेंगे.

शादी समारोह का आयोजन सुरेंद्रनगर ज़िले के दिग्सर गांव में किया जाएगा.

सूचना के मुताबिक़ एक सादे समारोह में शादी की रस्में पूरी की जाएंगी, जिसमें क़रीब 100 मेहमानों को ही शामिल किया जाएगा.

दिग्सर में शादी के बाद हार्दिक और किंजल पटेल अपने गांव विरमगाम जाएंगे.

अपनी शादी और किंजल के साथ रिश्ते के बारे में हार्दिक ने बीबीसी गुजराती से खुल कर बात की.

उन्होंने कहा, "हमलोग पिछले सात सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और रिश्ते में हैं. हालांकि हमारे परिवारों को हमारे रिश्ते के बारे में तीन, साढ़े-तीन साल पहले ही पता चला."

हार्दिक ने कहा कि शादी की बात काफ़ी वक़्त से चल रही थी. ये लव मैरिज नहीं, अरेंज मैरिज है.

"23 तारीख़ को हमारी सगाई होगी और 27 को शादी होगी."

हार्दिक ने बताया कि जब उन्होंने पाटीदार आंदोलन शुरू किया था और उन्हें गिरफ़्तार किया गया था, तब उन्होंने और किंजल ने अपने रिश्ते के बारे में एक-दूसरे के घरों पर बताया था.

हार्दिक ने बताया, ''किंजल के परिवार को पसंद नहीं था कि मैं राजनीति में आऊं. लेकिन समय के साथ सबकुछ बदलता चला गया.''

किंजल ने बीए और एमए किया है, उसके बाद वे एचआर का कोर्स कर रही थीं.

हार्दिक बताते हैं, "जब मैं जेल में था तब पढ़ाई में उनका मन नहीं लगा और एचआर का कोर्स छोड़ दिया. अब वो एलएलबी कर रही हैं."

"उन्हें घूमना बहुत पसंद है और मुझे बिल्कुल नहीं, क्योंकि मेरे पास वक़्त नहीं होता लेकिन अगर समय मिले तो मुझे उनके साथ घूमने जाने में कोई दिक्कत नहीं है."

"उन्हें पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है. वो डायरी भी लिखती हैं और नोवेल पढ़ना उन्हें पसंद है."

शादी के बाद हनीमून पर कहां जाएंगे, इस सवाल के जवाब में हार्दिक ने कहा कि इस बारे में अभी तक कोई योजना नहीं बनी है.

उन्होंने कहा, ''अभी तो लोकसभा के चुनाव आ रहे हैं लेकिन किंजल को वचन दिया है कि मैं उन्हें चुनावों के बाद कहीं घुमाने ले जाऊंगा.''

हार्दिक के पिता भरतभाई पटेल ने बीबीसी गुजराती से बात करते हुए कहा कि उनके समाज के रिवाज़ के मुताबिक सादगी से शादी होगी.

"हमें पहले मेहसाना में शादी समारोह करना था लेकिन हार्दिक को वहां जाने की इजाज़त नहीं है."

"इसलिए हम अब सुरेंद्रनगर के दिग्सर में शादी समारोह का आयोजन करने जा रहे हैं. इस शादी में दोनों तरफ के करीब 100 लोग आएंगे."

मायावती का अपमान एक और महिला साधना सिंह ने क्यों किया: ब्लॉग

आपने भी शायद सुना होगा कि भारतीय जनता पार्टी की महिला विधायक साधना सिंह ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि बहुजन समाजवादी पार्टी नेता मायावती 'महिला हैं या पुरुष' और उन्होंने 'सत्ता के लिए इज़्ज़त बेच दी'.

साधना सिंह ने अब अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांग ली है पर मायावती के रूप पर और महिला जैसी ना लगने पर, महिला नेता अक्सर टिप्पणी करती आई हैं. हर एक टिप्पणी, पिछली से और बद्तर होती है.

पर इसकी वजह समझने से पहले ये भी बता दें कि महिलाएं ही क्या, पुरुष भी इसमें कभी पीछे नहीं रहे हैं.

जब 1990 के दशक में मायावती ने पहली बार बाल छोटे कटवाए तो समाजवादी पार्टी मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 'परकटी महिला' कहा था.

यानी अच्छी भारतीय औरत लंबे बाल रखती है, बाल काट ले तो 'परकटी' पाश्चात्य सभ्यता वाली हो जाती है.

1995 में जब उत्तर प्रदेश की गठबंधन सरकार से बहुजन समाजवादी पार्टी ने समर्थन खींच लिया तो उसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य के गेस्टहाउस में ठहरी मायावती पर हमला बोल दिया.

'सुंदर औरत' और बलात्कार
हमले के बाद मुलायम सिंह यादव के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा दर्ज हुआ.

पत्रकार नेहा दीक्षित के मुताबिक़ 20 साल बाद भी वो मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. मायावती पर अपने एक लेख में उन्होंने बताया कि बलात्कार के आरोप के बाद मुलायम सिंह यादव ने उसी साल मैनपुरी में एक रैली में कहा था, "क्या मायावती इतनी सुंदर हैं कि कोई उनका बलात्कार करना चाहेगा?"

यानी 'सुंदर' औरतों का ही बलात्कार होता है, औरत सुंदर नहीं हो तो बलात्कार करने 'लायक़' नहीं है और अपनी सुंदरता की वजह से औरत ही अपने बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार है.

बयान और नेताओं के भी हैं, पर उन्हें दोहराने से क्या फ़ायदा. इतना जानना ही काफ़ी है कि मायावती पर औरतें ही नहीं मर्द भी 'सेक्सिस्ट' टिप्पणियां करते रहे हैं.

आप सहजता से ये मान सकते हैं कि मुलायम सिंह यादव समेत अन्य पुरुष नेता अपनी परवरिश और समाज में प्रचलित पुरानी सोच के चलते ये सब कहते हैं, तो औरतें भी उसी राजनीतिक माहौल में जी रही हैं.

समाज जब पुरुष-प्रधान होता है तो औरतों को, ख़ास तौर पर दलित औरतों को नीची नज़र से देखना सही समझा जाने लगता है.

साधना सिंह ने जब मायावती के 'कपड़े फटने की वजह से उनके कलंकित महिला' होने की बात की तो शायद ये नहीं सोचा होगा कि उनकी बात का आशय ये है कि बलात्कार पीड़ित औरत हमेशा के लिए 'कलंकित' हो जाती है.

या जब साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता शायना एन.सी. ने जयपुर में एक सम्मेलन में कहा था कि उन्हें समझ नहीं आता कि मायावती 'ही' हैं या 'शी'.

शायना फ़ैशन डिज़ाइनर भी हैं और मायावती के पहनावे, बालों के स्टाइल पर उनकी ये टिप्पणी इस समझ को दिखलाती है कि 'औरत' मानी जाने के लिए एक तरह का पहनावा और श्रृंगार ज़रूरी है.

बल्कि वाम नेता कविता कृष्णनन के मुताबिक़ इसका ये मतलब भी था कि, "सत्ता मर्दों का अधिकार-क्षेत्र है और मायावती शादीशुदा नहीं हैं, उनके छोटे बाल हैं, साड़ी नहीं पहनती हैं इसलिए वो 'वुमनली वुमन' है".

Friday, January 18, 2019

习近平在京津冀三省市考察并主持召开京津冀协同发展座谈会

新华社北京1月18日电 中共中央总书记、国家主席、中央军委主席习近平近日在京津冀考察,主持召开京津冀协同发展座谈会并发表重要讲话。他强调,要从全局的高度和更长远的考虑来认识和做好京津冀协同发展工作,增强协同发展的自觉性、主动性、创造性,保持历史耐心和战略定力,稳扎稳打,勇于担当,敢于创新,善作善成,下更大气力推动京津冀协同发展取得新的更大进展。

  中共中央政治局常委、国务院副总理韩正陪同考察河北雄安新区和北京市并出席座谈会。

  隆冬时节的华北大地,寒气袭人,滴水成冰。1月16日至18日,习近平分别在河北省委书记王东峰和省长许勤,中共中央政治局委员、天津市委书记李鸿忠和市长张国清,中共中央政治局委员、北京市委书记蔡奇和市长陈吉宁陪同下,深入河北雄安新区、天津、北京,实地了解京津冀协同发展情况。

  16日上午,习近平首先来到河北雄安新区规划展示中心,仔细听取新区总体规划、政策体系及建设情况介绍,察看启动区城市设计征集成果模型和即将启动的重大工程、重点项目展示。他强调,建设雄安新区是千年大计。新区首先就要新在规划、建设的理念上,要体现出前瞻性、引领性。要全面贯彻新发展理念,坚持高质量发展要求,努力创造新时代高质量发展的标杆。习近平通过大屏幕连线京雄城际铁路雄安站建设工地现场,向施工人员挥手致意,称赞他们是雄安新区建设的开路先锋,嘱咐他们科学施工、注意安全、确保质量,按期完成任务,并向他们及全国奋战在一线的劳动者们致以亲切问候和良好祝愿。

  习近平随后步行来到政务服务中心,察看服务窗口,了解雄安新区深化治理体制机制改革、打造服务型政府工作情况。习近平充分肯定雄安新区政务服务中心推行“一枚印章管到底”全贯通服务的做法。他指出,要运用现代信息技术,推进政务信息联通共用,提高政务服务信息化、智能化、精准化、便利化水平,让群众少跑腿。在政务服务中心大厅,部分进驻企业代表围拢上来,习近平同他们亲切交谈。他强调,建设雄安新区,需要大批企业共同参与。无论是国有企业还是民营企业,无论是本地企业还是北京企业,无论是中国企业还是外资企业,只要符合新区产业发展规划,我们都欢迎。希望广大企业抓住这个千载难逢的历史机遇,创造新的辉煌业绩。

  雄安新区坚持生态优先、绿色发展,率先启动生态基础设施建设和环境整治。16日下午,习近平来到“千年秀林”大清河片林一区造林区域,乘车穿行林区察看林木长势,并在秀林驿站结合展板听取雄安新区生态建设总体情况和“千年秀林”区域植树造林情况介绍,登上二层平台远眺林区全貌,对他们运用科学方法植树造林、运用信息化手段管林护林的做法表示赞赏。他强调,先植绿、后建城,是雄安新区建设的一个新理念。良好生态环境是雄安新区的重要价值体现。“千年大计”,就要从“千年秀林”开始,努力接续展开蓝绿交织、人与自然和谐相处的优美画卷。他仔细询问参与造林护林的村民工作和收入情况,叮嘱要吸引当地农民积极参与,让农民从造林护林中长久受益。

  17日上午,习近平来到天津南开大学考察调研。南开大学成立于1919年,是一所具有光荣爱国传统的名校。习近平参观了校史展览,详细了解南开大学历史沿革、学科建设、人才队伍、科研创新等情况。习近平指出,学校是立德树人的地方。爱国主义是中华民族的民族心、民族魂,培养社会主义建设者和接班人,首先要培养学生的爱国情怀。高校党组织要把抓好学校党建工作和思想政治工作作为办学治校的基本功。习近平同在现场的部分院士、专家及中青年教师代表进行了交流。他指出,专家型教师队伍是大学的核心竞争力。要把建设政治素质过硬、业务能力精湛、育人水平高超的高素质教师队伍作为大学建设的基础性工作,始终抓紧抓好。在元素有机化学国家重点实验室,他强调,要加快一流大学和一流学科建设,加强基础研究,力争在原始创新和自主创新上出更多成果,勇攀世界科技高峰。他勉励师生们把学习奋斗的具体目标同民族复兴的伟大目标结合起来,把小我融入大我,立志作出我们这一代人的历史贡献。走出实验室,广场上挤满了学生,大家高呼“总书记好”、“总书记辛苦”,齐声高喊“爱我中华、振兴中华”,还唱起《我和我的祖国》。习近平同近处的同学亲切握手,向远处的同学们招手致意。掌声、歌声、欢呼声在校园里久久回荡。

  随后,习近平来到天津和平区新兴街朝阳里社区,走进党群服务中心综合办事大厅,了解社区网格化管理、基层党建、便民服务等情况。习近平指出,社区工作是具体的,要坚持以人民为中心,摸准居民群众各种需求,及时为社区居民提供精准化精细化服务。习近平十分关心退役军人服务保障工作。他走进社区退役军人服务管理站,详细询问社区在服务退役军人方面的具体做法。他强调,成立退役军人事务机构,就是要加强退役军人管理保障工作,让军人成为全社会尊崇的职业。各级党委和政府要高度重视,切实把广大退役军人合法权益维护好,把他们的工作和生活保障好。朝阳里社区是全国首个社区志愿者组织的发祥地。在社区志愿服务展馆,习近平同志愿者们亲切交流。他强调,志愿服务是社会文明进步的重要标志,是广大志愿者奉献爱心的重要渠道。要为志愿服务搭建更多平台,更好发挥志愿服务在社会治理中的积极作用。

Thursday, January 10, 2019

झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव की जमानत याचिका खारिज की

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दी। पिछले हफ्ते इस पर करीब दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान लालू के वकील कपिल सिब्बल ने उनकी बीमारियों और उम्र का हवाला दिया था। वहीं, सीबीआई के वकील ने लालू की जमानत याचिका का विरोध किया। लालू ने जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में हस्तक्षेप याचिका दायर कर जमानत की मांग की थी।

जमानत की अवधि 6 हफ्ते बढ़ाने की अपील की गई थी

याचिका में कहा गया था कि देवघर, चाईबासा और दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में इससे पहले भी उनको जमानत मिल चुकी है। लिहाजा उन्हें इस बार भी जमानत की दी जाए। सिब्बल ने मुंबई के हॉस्पिटल के लालू यादव की बीमारियों से संबंधित सर्टिफकेट भी पेश किए। जमानत की अवधि 6 हफ्ते और बढ़ाने की नई याचिका में कहा गया था कि लालू गंभीर रूप से बीमार हैं। वह प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हार्ट, किडनी और डिप्रेशन समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

जमानत के लिए तीन आधार बताए गए
लालू की ओर से दायर याचिका में तीन बातों को आधार बनाया गया था। लालू के वकील की ओर से जिस पहली बात को आधार बनाया गया, उसमें कहा गया कि इसी मामले में अन्य दोषियों को जमानत मिल चुकी है, खुद लालू को भी पूर्व में जमानत मिली थी, लिहाजा बेल दी जाए। दूसरा लालू के मेडिकल ग्राउंड और तीसरा आधार उम्र को बनाया गया।

23 दिसंबर 2017 से जेल में हैं लालू यादव
लालू को चारा घोटाला के देवघर ट्रेजरी केस में 23 दिसम्बर 2017 को दोषी करार दिया था। तब से वह जेल में है। पिछले साल 17 मार्च को तबीयत बिगड़ने पर पहले रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया था। कोर्ट ने उन्हें 11 मई को इलाज के लिए छह हफ्ते की जमानत मंजूर की थी। इसे बढ़ाकर 14 और फिर 27 अगस्त तक किया। कोर्ट ने इसके बाद 30 अगस्त को लालू को कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था।

फिलहाल रिम्स में हैं भर्ती
लालू बीमार होने की वजह से अभी रिम्स में भर्ती हैं। दुमका, देवघर और चाईबासा में फर्जीवाड़े के तीनों मामलों में हाईकोर्ट में उनकी अपील याचिका पर सुनवाई हो रही है।

मकर संक्रांति से ही होता है ऋतु परिवर्तन
मकर संक्रांति का एक और महत्व है जो हमारी दिनचर्या को प्रभावित करता है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है। इससे भारत सहित सूर्य के उत्तरी गोलार्ध क्षेत्र में सूर्य की किरणें सीधी पड़ने से ऋतु परिवर्तन होता है। ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होने के साथ ही दिन बड़े व रातें छोटी होने लगती हैं। यानी सर्द मौसम धीरे-धीरे विदा होने लगता है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमते हुए 72 से 90 साल के बीच में एक डिग्री पीछे हो जाती है। इस कारण से सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का समय व दिन बदलते रहते हैं। 2014 से 2016 तक मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई गई, जबकि 2017 व 2018 में यह 15 जनवरी को ही मनी थी। वैसे आपको बता दें कि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में यह पर्व पोंगल के रुप में मनाया जाता है।

Thursday, January 3, 2019

दुनिया के पहले ई-स्पोर्ट्स स्टेडियम में बाहर से भी देख सकेंगे गेम्स, कांच की दीवारों पर हैं पारदर्शी एलईडी

ई-स्पोर्ट्स के लिए दुनिया का पहला स्टेडियम चीन के शहर चोंगकिंग में बनाया गया है। झोंगशियान ई-स्पोर्ट्स स्टेडियम की दर्शक क्षमता करीब 20 हजार है। इसे हॉन्गकॉन्ग के आर्किटेक्ट बैरी हो ने डिजाइन किया है। स्टेडियम की डिजाइन विंग (पंख) जैसी है। यह स्टेडियम 60 हजार स्क्वायर फीट में बना है। इसकी लागत 1517 करोड़ रुपए है। अगले 5 साल तक चीन के ई-स्पोर्ट्स गेम्स इसी स्टेडियम में होंगे।

स्टेडियम की दीवारें कांच की हैं। इन पर पारदर्शी एलईडी स्क्रीन लगी हैं। इससे मैच के दौरान पूरी बिल्डिंग वीडियो डिस्प्ले में बदल जाएगी। अगर किसी को स्टेडियम के अंदर बैठने की जगह नहीं मिली तो वे बाहर से गेम्स देख सकेंगे।

यह सिर्फ दो लोगों का खेल नहीं, बल्कि कार्निवल जैसा : बैरी हो

बैरी हो ने बताया, 'ई-स्पोर्ट्स दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। सभी को लगता है कि यह दो लोगों का ऑनलाइन खेल है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह तो बिल्कुल कार्निवल जैसा है। इसे चीन में होने वाले एशियन गेम्स (2022) में भी मेडल इवेंट के रूप में शामिल कर लिया गया है, इसलिए हमने ऐसा स्टेडियम बनाने का फैसला किया।'

ई-स्पोर्ट्स का इतिहास

पहला ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट 1972 में हुआ था, इंटरनेट पर इसकी शुरुआत 1990 में हुई।
पहला ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट अक्टूबर 1972 में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में खेला गया था।
'स्पेसवार' नाम के इस खेल में 24 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
विजेता को रोलिंग स्टोंस मैग्जीन का वार्षिक सब्सक्रिप्शन दिया गया था।
इसी मैग्जीन ने इस इवेंट का कवरेज भी किया था। इसके बाद 1980 में ई-स्पोर्ट्स की स्पेस इनवेडर्स चैंपियनशिप हुई।
इसमें 10 हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। यह ई-स्पोर्ट्स की पहली बड़ी चैम्पियनशिप थी।
1990 में पहली बार ऑनलाइन (इंटरनेट बेस्ड) ई-स्पोर्ट्स गेम खेला गया। इसमें 16 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
1997 में ई-स्पोर्ट्स की पहली लीग साइबर एथलीट प्रोफेशनल लीग (सीपीएल) हुई। इसमें प्राइज मनी दी गई
सीपीएल ई-स्पोर्ट्स में प्राइज मनी देने वाला पहला टूर्नामेंट रहा। इसमें 10 लाख रुपए प्राइज मनी थी।

इस साल साउथ ईस्ट एशियन गेम्स में 6 मेडल इवेंट
2019 : इस साल साउथ ईस्ट एशियन गेम्स में ई-स्पोर्ट्स के 6 मेडल इवेंट होंगे। इसमें सबसे ज्यादा फाइटिंग गेम्स, फर्स्ट पर्सन शूटर्स, रियल टाइम स्ट्रेटजी और मल्टीप्लेयर ऑनलाइन बैटल एरिना फेमस हैं।
2020 : टोक्यो ओलिंपिक में शामिल किया जा सकता है।

20 साल में 1770 गुना बढ़ी प्राइज मनी, 2017 में 790 करोड़ रुपए दिए गए
सबसे पहली बार प्राइज मनी 1997 में साइबर एथलीट प्रोफेशनल लीग में दी गई। तब प्राइज मनी 10 लाख रुपए थी। अब द इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा 177 करोड़ रुपए मिलते हैं। प्राइज मनी 20 साल में 1770 गुना बढ़ी। 2017 में 790 करोड़ रुपए की प्राइज मनी दी गई। इसकी प्राइज कन्फेडरेशंस कप फुटबॉल (145 करोड़) और एनबीए (95 करोड़ रुपए) से भी ज्यादा है।

पिछले साल 38 करोड़ व्यूअरशिप, 2021 तक 58.9 करोड़ होने की उम्मीद
2018 में ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट को 38 करोड़ लोगों ने देखा। इसमें से 21.5 करोड़ व्यूअर हमेशा देखने वाले रहे, जबकि 16.5 करोड़ व्यूअर कभी-कभी देखने वाले रहे। 2021 तक व्यूअरशिप 58.9 करोड़ होने की उम्मीद है।

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